क्या है स्ट्रेटेजिक आयल रिज़र्व

1990 में खाड़ी देशों में अशांति के कारण भारत मे तैल की कमी के आर्थिक व्यवस्था डगमगा गया।

जिसे वापस पटरी पर काने के लिये देश को IMF (international monetory fund) से उधार लेना पड़ा।

इस आर्थिक बदलाव ने देश की दिशा व दशा दोनो बदल दी। किन्तु तैल के महत्व को समझा गया।

तैल हमारे देश की ऊर्जा है जिसका सुरक्षित रहना देश के लिए जरूरी था क्योंकि 80% से ज्यादा का तैल हम पश्चिमी देशों से मंगाते हैं।

इन्ही बातो को ध्यान में रखकर 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी जी ने स्ट्रेटेजिक आयल रिज़र्व बनाने का निर्णय किया।

किन्तु 2004 में सरकार बदलने के साथ इस विषय को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

किन्तु 2015 में पुनः इस विषय पर काम शुरू हुआ।

स्ट्रेटेजिक आयल रिसर्व

फेज 1- तीन जगह मंगलौर (कर्नाटक),विशाखापट्टनम(आंध्रप्रदेश) और पुदुर (केरल) 5.33 मिलियन मेट्रिक टन का रिसर्व बनाया जा रहा है जो एमरजेंसी में 10 दिन के लिए उपयुक्त होगा ।

फेज 2- दो जगह चंदिखोल (उड़िसा) व उडूपी (कर्नाटक) 6.5 मिलियन मेट्रिक टन जो एमरजेंसी में 12 दिनों के लिए उपयुक्त होगा।

इन सब के अलावा भारत मे आयल रिफाइनरी की कंपनियों के storage लगभग 65 दिन का आयल रिसर्व कर सकती है।

इस प्रकार भारत मे लगभग 90 दिनों का एमरजेंसी आयल रिसर्व हो जायेगा। जिससे किसी भी प्रकार के संकट से निपटने में आसानी होगा।

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