क्या होगा पाकिस्तान का?

वो कहते हैं ना हमे दोस्त चुनने का पूरा हक है लेकिन पड़ोसी नही। ऐसे ही एक देश पाकिस्तान, भारत का पड़ोसी जो आज आर्थिक तंगी व अपने पाले हुए आतंकवाद से जूझ रहा है।

पाकिस्तान के भविष्य को समझने के लिए ये बहुत जरूरी है कि उसके भूत काल के व्यवहार को समझना जरूरी है।

भारत के बटवारे का बीज 1909 में ही अंग्रेजों ने यहाँ के लोगों के दिमाग मे डाल दिया।

जो पाकिस्तान के रूप में 1947 में बना। इस देश के बनने का बुनियाद नफरत था। और माना जाता है कि पाकिस्तान के लोगो मे 95% भारत से नफरत है और 5% उन्हें खुद के देश से प्यार।

पाकिस्तानियो का यही रवैया वहां की सरकारों द्वारा उठाया गया और लोगों के जहन में नफरत भरा गया।

यदि इस बात को और विस्तृत रूप से देखें तो समझ मे आएगा कि पाकिस्तान तो हर बार मोहरा रहा है पश्चिमी देशों का।

पश्चिमी देश हमेशा से एशिया में अपना प्रभुत्व चाहते थे क्योंकि दुनिया का बहुत बड़ा बाजार है । क्योंकि यहाँ की जनसंख्या सबसे ज्यादा है व प्राकृतिक संसाधन का भंडार है।

पश्चिमी देश ज्यादातर पूंजीवाद देश है जिन्हें सिर्फ व्यापार व लाभ दिखता है।

एशिया में बड़े देश जैसे कि चीन व रुस है और ये दोनों ही देश समाजवादी देश है। पूंजीवाद व समाजवाद की वैचारिक संघर्ष कई सालो से चल रहा है।

पश्चिमी देश एशिया में अपना प्रभुत्व जमाने के लिए उन देशों को संपर्क व सहायता की जिनसे वो आसानी से संपर्क कर सके। और वो देश जिनकी लोकतंत्र कमजोर हो।

भारत का लोकतंत्र मजबूत होने के कारण भारत से इस प्रकार का सम्बंध मुश्किल था।

लेकिन पाकिस्तान के एक सैनिक देश है यानी सैनिकों का शासन है और ऐसे देश से मोलभाव करना आसान होता है।

पाकिस्तान उनमे से एक था जिसके पूरी तरह से पश्चिमी देशों ने उपयोग किया। लेकिन दाव पर पाकिस्तान की जनता थी जहाँ उनके जहन में नफरत घोल दिया जिसको बदलने में काम से कम 25 से 30 साल लग जायेगा क्योकि व्याहारिक बदलाव मतलब एक generation का बदलाव।

और ये तब होगा जब लगातार 4 – 5 बार लोकतांत्रिक सरकार बने जो अभी के समय मे नामुमकिन है।

चीन और रूस भी इन बातों को समझते है उन्हें पता है कि अगर उन्होंने पाकिस्तान का साथ छोड़ा तो इनके सर पे अमेरिका जैसे बड़े देश आ बैठेगें जो इन पर एक प्रकार का दबाव पड़ेगा।

इसलिए अक्सर भारत के खिलाफ चीन, पाकिस्तान का साथ देता है।

लेकिन समय जिस तरह बदल रहा है और पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का अति कमजोर होना ।

पाकिस्तान के टूटने की ओर बढ़ रहा है। यदि पाकिस्तान को बचना है तो वहा की जनता को जागना होगा सबसे पहले देश को एक धर्मनिरपेक्ष देश बनाना होगा व वहाँ के आर्मी के खिलाफ आंदोलन करना होगा और आर्मी की शक्तियों को एक दायरे में लाने की मांग करनी होंगी।

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