नीम युक्त यूरिया क्यूं ?

हमारे देश की मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी है जिसकी भरपाई के लिए यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन ये यूरिया बहुत ही तेजी से मिट्टी में मिल जाता है जिसके कारण पौधे सिर्फ 35- 40% तक ही नाइट्रोजन ग्रहण कर पाते है।

बाकी का नाइट्रोजन बह जाता है और प्रदूषण बन कर हमारे स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है।

यही नही ज्यादातर इन यूरिया को दूसरे इंडस्ट्री में बेच दिया जाता था।

इन सब के कारण भारत सरकार को हर साल लगभग 70000 करोड़ खर्च करना पड़ता था इन खाद्य कंपनियों की हानि से उबारने के लिए।

लेकिन नीम युक्त यूरिया बहुत ही उपयोगी रहा सरकार को अभी कंपनियों को 20000 करोड़ की सहायता देना पड रहा है। इसके उपयोग के कारण यूरिया किसी अन्य इंडस्ट्री में उपयोग करने लायक नही रहता।

नीम युक्ति यूरिया से नाइट्रोजन बहुत ही धीरे धीरे मिट्टी में मिलता है ।

जिससे पौधों को पर्याप्त समय मिलता है नाइट्रोजन ग्रहण करने के लिए।

देश में लगभग 2.5 करोड़ नीम के वृक्ष है जो 80% सुखा प्रभावित क्षेत्रों में उगते हैं जैसे गुजरात, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक इत्यादि।

इन क्षेत्रों से एक साल में लगभग 300000 टन नीम का फ्रूट इकट्ठा किया जाता है।

90% जैविक खाद्य बनाने में उपयोग होता है।

10% का तेल निकाला जाता है जो कि लगभग 3000 टन होता है। इससे 15%, 3.2 करोड़ टन यूरिया को नीम युक्त किया जाता है यानी 85% अभी भी यूरिया या तो नीम युक्त नही है या अशुद्ध नीम तैल का इस्तेमाल किया गया है।

नीम तैल को बनाने में किसानों के लगभग ₹150 खर्च होता है जबकि बिकता सिर्फ ₹90 में है।

इस दिशा में किसानों को जागरूक होने की जरूरत है।

देश की लगभग 69% लोग गाँव में रहते हैं।

और देश की लगभग 49 % जनसंख्या कृषि क्षेत्र पर निर्भर करता है।

इससे ये जाहिर होता है हमारे देश की अर्थव्यवस्था किसानों के हाथ से ही होकर किसी और क्षेत्र की जाता है।

किसानों का जागरूक होना उनका तेजी से आगे बढ़ने में कारगर होगा, सरकार द्वारा दिये जाने वाले सुविधाओं ने किसानों को निर्भर बना दिया है।

आज के इंटरनेट की दुनियां में किसानों को अपनी कुशलता व ज्ञान के आधार पर नई मिशाल कायम करना चाहिए।

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