Article 370 तब से अब तक🇮🇳

1947 में जब भारत आजाद हुआ, तब लगभग 562 रियासतें भारत मे थीं।

सभी रियासतें भारत मे विलय हो गई सिवाय जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू कश्मीर।

इन रियासतों में जहाँ प्रजा हिन्दू था तो राजा मुस्लिम और कहीं राजा हिन्दू तो प्रजा मुस्लिम समस्या था।

जैसे हैदराबाद और जूनागढ़ के शासक मुश्लिम थे और पाकिस्तान में विलय होना चाहते थे। लेकिन मेजोरिटी प्रजा हिन्दू थी तो ये सफल न हो सके और अंत मे भारत मे विलय होना पड़ा।

जम्मू कश्मीर के राजा हरि सिंह एक हिन्दू राजा थे और वहा की लोग ज्यादातर मुस्लिम थे। इसलिए राजा ना तो पाकिस्तान में विलय होना चाहते थे और ना ही भारत मे।

लेकिन 1948 में पाकिस्तान ने मौका देखकर कबिलियाई लड़ाको के साथ मिलकर कश्मीर पर हमला कर दिया जिससे हरि सिंह ने भारत मे विलय होना ही सही समझा।

लेकिन जैसा कि जनता वहाँ की मुस्लिम थी तो वह विद्रोह कर सकती थी और जूनागढ़ जैसी स्थिति हो सकती थी, इस बात को ध्यान में रखकर व उनके हितों का ख्याल करके Article 370 लाया गया।

Article 370 एक प्रकार का सुरक्षा था उनके संस्कृति को बनाये रखने के लिए।

पाकिस्तान कश्मीर को किसी भी कीमत पर हासिल करना चाहता था क्योंकि की इन्ही रास्ते से होकर पाकिस्तान में नदियां जाती है जिस पर पाकिस्तान पूर्ण रूप से निर्भर था। यदि इन नदियों को भारत रोक दे तो पाकिस्तान प्यास से ही मर जाता। इसी डर से पाकिस्तान किसी भी कीमत पर कश्मीर को हथियाने की कोशिश की।

नदियों की समस्या को सिंधु जल समझौता 1960 से ठीक कर दिया गया । लेकिन तब तक कश्मीर इनके प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया क्योंकि इसके कारण 1948 में एक युद्ध मे भारत से हार का भी सामना करना पड़ा था।

1962 में भारत चीन युद्ध हुआ, और पाकिस्तान ने मौका देखकर 1965 में युद्ध छेड दिया लेकिन इस युद्ध मे भी पाकिस्तान ने सिर्फ हारा बल्कि UN के रेसोल्यूशन को भी तोड़ दिया जो पहले युद्ध मे लाया गया था जिसमें यह था कि कोई भी देश ( भारत व पाकिस्तान) सीमा का उल्लंघन नही करेंगें लेकिन पाकिस्तान ने कर के अपने ही पैरो पर ऐसा कुल्हाड़ी मारा था जिसका दर्द 5 अगस्त 2019 से देखा जा सकता है।

इसके बाद पाकिस्तान भारत युद्ध 1972 जिसमे पाकिस्तान दो टुकड़ों में बट गया।

बंगलादेश जो पहले ईस्ट पाकिस्तान था। व पाकिस्तान।

इन तीन युद्धों से पाकिस्तान को एक बात तो समझ मे आ गया कि वो भारत से आमने सामने के युद्ध मे नही जीत सकता।

इस बात को ध्यान में रखते हुए वहा के सेना अध्यक्ष मोहम्मद जिया उल हक जो आगे चलकर पाकिस्तान के 6 प्रेसिडेंट बने।

इन्होंने ने एक रिपोर्ट तैयार की जिसका सिद्धांत था “भारत को 1000 घाव देना”

इसके अनुसार Article 370 एक ऐसा माध्यम था जो इस सिद्धांत को सफल होने में एक महत्वपूर्ण कवच था।

इस सिद्धांत को लागू करने के लिए “operation Topac” चलाया। जिससे घाटी में आतंकवाद को बढ़ावा देने लगा।

घाटी को राजनीति, सामाजिक चिंता से मुड़कर राजनेताओं की खुद की झोली भरने में लग गयी जिसका कभी ना कभी तो फटना तय था। जो हुआ भी 5 अगस्त 2019 को।

बदलाव प्राकृतिक नियम है समय के हिसाब से चीजे यही नही बदलती तो वह नुकसान देह हो जाता है।

कश्मीर में आर्टिकल 370 जरूरी था 1947 में कश्मीर के लोगों का विश्वास जितने के लिए।

समय के साथ कश्मीर के लोगो को लगा भी वह भारत के साथ सुख और समृद्धि से जी सकते है।

1960 के लगभग कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने की उम्मीद पूरी लगने लगी थी।

पर यही वो समय था जब कश्मीर के मुट्ठीभर राजनेताओं को एहसास हुआ यदि कश्मीर से 370 हटा तो उनका अस्तित्व भविष्य (जॉब) खतरे में आ सकता और यही से स्टार्ट हुआ आर्टिकल 370 के हटने के डर का माहौल बनाना जिसमे पाकिस्तान ने भरपूर साथ दिया।

खैर आज यह डर का व्यापार बंद हो चुका है और घाटी के लोग खुद के उत्थान के पूरी तरह से एहसास करेंगे।

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