A Macro view on the Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana (PMMVY)

the Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana (PMMVY) launched in 2017.

Nearly 50 lakh women have benefited since its launch, providing maternity benefits of Rs 5,000 in installments. Under the scheme, 49,58,172 pregnant and lactating mother have been provided the money in three installments during the period of pregnancy and lactation for the first living child.
The eligible beneficiaries also receive cash incentive as per the approved norms towards maternity benefit under the Janani Suraksha Yojana (JSY), administered by the Ministry of Health and Family Welfare after institutional delivery so that on an average, a woman gets Rs 6,000.
Most of the beneficiaries are from Uttar Pradesh, with 8,19,893 women, followed by Andhra Pradesh, with 4,10,134 beneficiaries.Tamil Nadu, with just 129 beneficiaries, is at the bottom of the list. Odisha and Telangana are implementing their state-specific maternity benefit scheme and are yet to roll out PMMVY

Progress of Ayushman Bharat in July 2019

Ayushman means “Being Blessed with long life”
Ayushman Bharat cards have so far been issued to more than eight crore people, who can avail of the scheme in over 16,000 hospitals across the country. of these, around 8,000 were from the public sector.
the government’s target was to set up 1.50 lakh health and wellness centres, of which 20,000 were already functional and 20,000 more would become operational by March next year.Till now, almost 32.5 lakh people have already availed this facility within the last eight months

Hong Kong Protest

Hong Kong become a colony of British empire after first Opium war 1842.

Opium war because Britishers sell opium in the china. These opium was cultivated in Indian subcontinent then carried to china through ship.

These ship unloaded the opium in China and loaded by tea.

These tea were unloaded in Britain and loaded with finished product to sell in the colonises.

It was business cycle of the European. China loose hong kong.

As opium was tobacco by which people gets effected due to Chinese authority take serious action against these activity which later converted into opium war between china and British empire.

In 1997 sovereignty over territory was transferred to china as a special administrative region.

Hong kong is different from China, in Human Development index Hong Kong comes at 7th rank.

This shows the development level in Hong Kong.

Hong Kong Protest

The 2019 Hong Kong anti extradition Bill cause for protest in Hong Kong.

People of Hong Kong believe that such legislation will blur the system of one country two system .

Bill was proposed in Feb 2019.

First protest in March 2019. Millions of people are on the road in protest.

And even in last july it’s going on recently police firing tear gas on people.

In communist government individual opinion doesn’t matter for them so that such protest will continue happene. Whether it’s matter of Uigur Muslims in China or now Hong Kong issue.

These things must be end and individual liberties must prevail in society.

भारत मे तेजी से घटती गरीबी

अमेरिका में स्थित “ब्रूकिंग” एक शोधकर्ताओं का समूह है जो दुनिया के कई देशों में फैली गरीबी का आकलन करता है।

इनके द्वारा प्रकाशित की जाने वाली रिपोर्ट वर्ल्ड पॉवर्टी क्लॉक” के अनुसार..

भारत अब दुनिया मे सबसे ज्यादा गरीब जनसंख्या वाला देश नहीं रहा।

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चीन का सिल्क रोड परियोजना- एक नजर

सिल्क रोड परियोजना चीन का एक महत्वाकांक्षी परियोजना है।

इसके अंतर्गत दुनिया की 65% जनसंख्या आयेगा जिनकी पूरी दुनिया के GDP मे 60% की भगीदारी है।

इसके अंतर्गत 6 आर्थिक गलियारों का निर्माण होना है जो 70 से ज्यादा देशों से होकर गुजरेंगी।

चीन इसमे $1 trillion का खर्च करेगा।

चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के कारण भारत इसका भागीदार नहीं है।

चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के निर्माण में $60 million का खर्च होना है लगभग इतना ही रुपया चीन हर साल भारत को अपने सामान को बेचकर कमा लेता है।

चीन अपने इस परियोजना में छोटे देशों को उधार देता था और कार्य मे लगने वाला सारा सामान चीन का इस्तेमाल करता था साथ ही काम करने के लिए कर्मचारी भी चीन के होते थे। इस कारण परियोजना में उपयोगी वस्तु व कर्मचारी उस छोटे देश का ना होने के कारण इन देशों को खुद को ठगा हुआ महसूस होने लगा। इसके कई देशों ने खुद को इस परियोजना से अलग करने लगे जो चीन के लिए अच्छा बिल्कुल नहीं है।

इसमे कोई दो रे नहीं कि इस तरह के परियोजना दुनिया के लिए लाभदायक है किंतु चीन को इसमे पारदर्शिता पर ध्यान देना चाहिए व छोटे देशों के हितों को ध्यान रखना चाहिए।

एक सेल्फ हेल्प ग्रुप के करोड़ों की उपलब्धि- मोटिवेशनल

यह उन चार जनजाति औरतों की कहानी है जो अपनी जीवन मे कभी स्कूल ना जा सकी, उसके बावजूद इन्होंने करोड़ों का व्यापार स्थापित कर दिया।

यह कहानी है राजस्थान के पाली जिला की जहाँ पर जनजातिय लोगों का जीवन जंगलों से लाये गए फलों व लकड़ियों पर निर्भर करता है।

इन्हीं में से वो चार औरते जीजाबाई, सांझीबाई, हंसाबाई व बबली भी जंगल जाया करती थी।

इन लोगो का पेड़ पर लगे सीताफल पर गया जो अक्सर पेड़ से टूटकर जमीन पे गिरकर बर्बाद हो जाते थे। तब उन लोगों अपने जीवन यापन के लिए इस सीताफल रोड के किनारे ही बेचना शुरू किया।

एक NGO कार्यवाहक गणपत लाल जी ने इनकी Self Help Group बनाने में मदद की। जिसका नाम “घूमर” रखा।

गणपत लाल जी ने इनकी पर्याप्त Training की व्यवस्था की।

इसके बाद ये लोग सीताफल को तुरंत बेचने के बजाय उसका व्यापार शुरू की जिसमें वे सीताफल के गुदा को निकाल के उसका supply आइसक्रीम व फल के क्रीम बनाने वाली कंपनियों को बेचने लगे।

शुरुआत तो इन्होंने एक जगह से किया लेकिन आज के समय मे जिले में इनके 7 से ज्यादा सेंटर हैं जो हजारों ग्रामीण महिलाओं के रोजगार का साधन है।

शुरुआत में कंपनी का वार्षिक आय लगभग 18 लाख था लेकिन आज करोड़ से भी ज्यादे का वार्षिक आय हो चुका है।

ये एक बहुत ही बढ़िया self Help Group व खाद्य प्रसंस्करण के योग का सफल उदाहरण है तथा SHG के महत्ता को भी दर्शाता है।

यदि इस मॉडल को पूरा देश व्यापक रूप से अपनाये तो देश की दशा व दिशा दोनों ही बदल जायेगा।

क्योंकि हमारे देश की 69% आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है व 49% जनसंख्या कृषि क्षेत्र से जुड़ा है।

नीम युक्त यूरिया क्यूं ?

हमारे देश की मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी है जिसकी भरपाई के लिए यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन ये यूरिया बहुत ही तेजी से मिट्टी में मिल जाता है जिसके कारण पौधे सिर्फ 35- 40% तक ही नाइट्रोजन ग्रहण कर पाते है।

बाकी का नाइट्रोजन बह जाता है और प्रदूषण बन कर हमारे स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है।

यही नही ज्यादातर इन यूरिया को दूसरे इंडस्ट्री में बेच दिया जाता था।

इन सब के कारण भारत सरकार को हर साल लगभग 70000 करोड़ खर्च करना पड़ता था इन खाद्य कंपनियों की हानि से उबारने के लिए।

लेकिन नीम युक्त यूरिया बहुत ही उपयोगी रहा सरकार को अभी कंपनियों को 20000 करोड़ की सहायता देना पड रहा है। इसके उपयोग के कारण यूरिया किसी अन्य इंडस्ट्री में उपयोग करने लायक नही रहता।

नीम युक्ति यूरिया से नाइट्रोजन बहुत ही धीरे धीरे मिट्टी में मिलता है ।

जिससे पौधों को पर्याप्त समय मिलता है नाइट्रोजन ग्रहण करने के लिए।

देश में लगभग 2.5 करोड़ नीम के वृक्ष है जो 80% सुखा प्रभावित क्षेत्रों में उगते हैं जैसे गुजरात, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक इत्यादि।

इन क्षेत्रों से एक साल में लगभग 300000 टन नीम का फ्रूट इकट्ठा किया जाता है।

90% जैविक खाद्य बनाने में उपयोग होता है।

10% का तेल निकाला जाता है जो कि लगभग 3000 टन होता है। इससे 15%, 3.2 करोड़ टन यूरिया को नीम युक्त किया जाता है यानी 85% अभी भी यूरिया या तो नीम युक्त नही है या अशुद्ध नीम तैल का इस्तेमाल किया गया है।

नीम तैल को बनाने में किसानों के लगभग ₹150 खर्च होता है जबकि बिकता सिर्फ ₹90 में है।

इस दिशा में किसानों को जागरूक होने की जरूरत है।

देश की लगभग 69% लोग गाँव में रहते हैं।

और देश की लगभग 49 % जनसंख्या कृषि क्षेत्र पर निर्भर करता है।

इससे ये जाहिर होता है हमारे देश की अर्थव्यवस्था किसानों के हाथ से ही होकर किसी और क्षेत्र की जाता है।

किसानों का जागरूक होना उनका तेजी से आगे बढ़ने में कारगर होगा, सरकार द्वारा दिये जाने वाले सुविधाओं ने किसानों को निर्भर बना दिया है।

आज के इंटरनेट की दुनियां में किसानों को अपनी कुशलता व ज्ञान के आधार पर नई मिशाल कायम करना चाहिए।

WHO के अनुसार…

दुनिया मे 2035 तक लगभग 1करोड़ 30 लाख स्वास्थ्य कर्मचारियों की जरूरत है।

आज अगर देखे तो लगभग 40 करोड़ लोग दुनिया में ऐसे हैं जिन्हें स्वास्थ्य समस्या के निवारण के लिये कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है।

इस बात को मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्र एक मौके की तरह ले सकते हैं।

तथा दूसरा संख्या चिंता का विषय है जिसपर दुनिया के सभी सरकारों को ध्यान देने की जरूरत है।